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ज़िलों में सर्वपक्षीय विकास को यकीनी बनाएंगे नवनियुक्त अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (शहरी विकास) - मुख्य सचिव



नवनियुक्त अधिकारियों को ’बसेरा’ समेत अन्य शहरी विकास योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने और लोगों की समस्याओं का हल करने के लिए कहा


चंडीगढ़, 21 जुलाई, 2021 (अरविंद शर्मा)


राज्य के सभी 23 जिलों में अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (शहरी विकास) के नये पद के सृजन से शहरी स्थानीय इकाईयों की कार्यकुशलता में और अधिक सुधार आएगा और ज़िला प्रशासन के साथ तालमेल और मज़बूत करके राज्य के शहरी क्षेत्रों के सर्वपक्षीय विकास को यकीनी बनाया जायेगा। 


यह जानकारी पंजाब की मुख्य सचिव विनी महाजन ने आज यहाँ अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नरों (शहरी विकास) के साथ पहली मीटिंग की अध्यक्षता करते करते हुए दी। इस मीटिंग में सभी डिप्टी कमिश्नर भी उपस्थित थे। 

मुख्य सचिव ने बताया कि अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (शहरी विकास) के 23 पदों, प्रत्येक ज़िला मुख्यालय पर एक पद, क्षेत्रीय डिप्टी डायरेक्टर स्थानीय निकायों की जगह पर बनाए गए हैं। अतिरिक्त सीईओ, पी.डब्ल्यू.एस.एस.बी. के पद की ज़िम्मेदारी भी अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (शहरी विकास) ही निभाएंगे। 


सभी नवनियुक्त अधिकारियों का स्वागत करते हुए महाजन ने सभी डिप्टी कमिश्नरों को समस्त ए.डी.सीज़. के लिए कार्यालय और अपेक्षित स्टाफ, जिसमें मुख्य तौर पर एम.आई.एस. माहिर, आई.टी. माहिर, एस.डब्ल्यू.एम. स्पेशलिस्ट, वेस्ट वाटर सम्बन्धी माहिर, सहायक प्रोग्राम अफ़सर (हाउसिंग) और (एन.यू.एल.एम.) शामल हैं, मुहैया करवाने के आदेश दिए।

मुख्य सचिव ने समस्त ए.डी.सीज़ को ’बसेरा’ स्कीम के तहत शहरों में झुग्गी-झौंपड़ियों में रहते लोगों के पुनर्वास सम्बन्धी प्रोजेक्टों, पी.यू.ई.आई. अमरुत, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधान मंत्री आवास योजना (पी.एम.ए.वाई.) और पी.एम.एस.ए.वी. निधि और शहरी विकास की अन्य योजनाओं की निगरानी करने के भी आदेश दिए जिससे इन प्रोजेक्टों के मानक, फंड का सभ्य प्रयोग और इनको समय पर पूरा करने को यकीनी बनाया जा सके। 
नवनियुक्त अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (शहरी विकास) को पंजाब म्युनिसिपल एक्ट अधीन प्रदान विभिन्न अधिकारों बारे जानकारी देते हुए प्रमुख सचिव स्थानीय निकाय अजोए कुमार सिन्हा ने मुख्य सचिव को बताया कि श्रेणी-2 और 3 की नगर कौंसिलों के सभी प्रस्तावों का इन अधिकारियों द्वारा निपटारा किया जायेगा जबकि श्रेणी-1 की नगर कौंसिलों और जिलों के सभी नगर सुधार ट्रस्टों के प्रस्तावों को इन अधिकारियों के द्वारा डायरैक्टर स्थानीय निकाय को मंजूरी के लिए भेजा जायेगा। नगर निगम वाले शहरों के नगर सुधार ट्रस्ट अपने प्रस्ताव सीधे डायरैक्टर स्थानीय निकाय को भेजेंगे।

उन्होंने आगे बताया कि ये अधिकारी चल रहे विकास कार्यों की निगरानी करने के लिए प्रोजैक्ट निगरान और समीक्षा समितियों का नेतृत्व भी करेंगे। इसके अलावा वह सरकार और अन्य विभागों के साथ तालमेल करके एम.पी.एस., एस.टी.पी., डब्ल्यू.टी.पी., ओ.एच.एस.आर. और ट्यूबवैल आदि स्थापित करने के लिए ज़मीन मुहैया करवाएंगे। उन्होंने आगे बताया कि ये अधिकारी जनता और चुने हुए स्थानी नुमायंदों की शिकायतों /माँगों का भी हल करने के लिए ज़िम्मेदार होंगे।
मुख्य सचिव ने कहा कि शहरी स्थानीय संस्थाओं की ज्यादातर सेवाएं जैसे कि पानी /सिवरेज के बिल, सम्पत्ति कर, लाइसेंस, बिल्डिग प्लान सम्बन्धी मंजूरियां, सार्वजनिक शिकायतों के निपटारे आदि सम्बन्धी सेवाएं ऑनलाइन कर दी गई हैं, इसलिए इन अधिकारियों के लिए नियमित तौर पर इन सेवाओं की निगरानी के लिए यत्न करना बेहद ज़रूरी है। 
शिकायतकर्ताओं की संतुष्टि के लिए प्राथमिकता के आधार पर सार्वजनिक शिकायतों का निपटारा करने पर ज़ोर देते हुए श्रीमती महाजन ने ज़िला अधिकारियों को शहरों के निचले इलाकों में पानी भरने सम्बन्धी समस्याओं को पहल के आधार पर हल करने के निर्देश दिए। उन्होंने आगे कहा कि बरसाती पानी की समस्या के जल्द निपटारे के लिए यत्न किये जाने चाहिएं जिससे लोगों को मुश्किलों का सामना न करना पड़े।
मुख्य सचिव ने कहा कि मौजूदा समय में राज्य में कोविड पाज़िटिव दर चाहे घटकर 0.3 फ़ीसदी रह गई है परन्तु सभी एडीसी (यू.डी) शहरों की स्वास्थ्य संस्थाओं की निगरानी करेंगे जिससे लोगों को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं यकीनी बनाईं जा सकें। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को भविष्य में कोविड के फैलाव को रोकने के लिए सतर्क रहने के लिए भी कहा।

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